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भस्म आरती कितने बजे होती है? समय और पूरा शेड्यूल

BA By Bhasma Aarti Booking Editorial· Updated 2026-09-05·6 min read

Key takeaways

भस्म आरती कितने बजे होती है — महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में तड़के लगभग 4:00 बजे शुरू होती है और लगभग 6:00 बजे तक चलती है। श्रद्धालुओं का प्रवेश रात लगभग 2:30-3:00 बजे से शुरू हो जाता है, इसलिए कन्फर्म बुकिंग वालों को रात 2 बजे तक गेट पर पहुँच जाना चाहिए। यह दुनिया का इकलौता ज्योतिर्लिंग है जहाँ प्रतिदिन भस्म से शृंगार-आरती होती है। नीचे मिनट-दर-मिनट शेड्यूल, पर्व के दिनों का बदला समय और प्रवेश की शर्तें दी गई हैं।

भस्म आरती का पूरा शेड्यूल — रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक

महाकाल भस्म आरती का समय समझने का सबसे आसान तरीका है पूरी रात की टाइमलाइन देखना (समय लगभग हैं, मंदिर समिति व्यवस्था अनुसार बदल सकती है):

समय (लगभग)क्या होता हैआपके लिए निर्देश
1:30-2:00 AMगेट के बाहर कतार बनने लगती हैवस्त्र बदलकर, सामान लॉकर में रखकर पहुँचें
2:30-3:00 AMअनुमति पत्र + ID जाँच के साथ प्रवेश शुरूप्रिंटेड अनुमति पत्र और मूल ID तैयार रखें
3:00 AM के आसपासपट खुलते हैं — जलाधारी से जल हटाना, पंचामृत अभिषेकनंदी हॉल/बैरिकेड क्षेत्र में बैठ जाएँ
4:00 AM के आसपासभस्म अर्पण और मुख्य आरती शुरूमहिलाएँ भस्म अर्पण के क्षणों में परंपरानुसार घूँघट/दृष्टि नीची रखती हैं
5:30-6:00 AMआरती पूर्ण, शृंगार दर्शनक्रम से बाहर निकलें — धक्का-मुक्की न करें
6:00 AM के बादसामान्य दर्शन कतार शुरूचाहें तो दोबारा सामान्य दर्शन कर सकते हैं

आरती में कुल बैठने-दर्शन का अनुभव करीब 2-2.5 घंटे का होता है। पूरी अवधि और 'कितना समय लगता है' का विस्तृत हिसाब bhasmaarti.in की गाइड पर अलग से पढ़ सकते हैं — यह पेज शुरू होने के समय पर केंद्रित है।

भस्म आरती इतनी सुबह क्यों होती है?

भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त आरती है — मान्यता है कि महाकाल दिन की पहली पूजा में भस्म से शृंगार स्वीकार करते हैं, और यह परंपरा पट खुलने के तुरंत बाद, सूर्योदय से पहले पूर्ण होनी चाहिए। इसीलिए मंदिर के पट खुलने का समय (लगभग 3:00 बजे) ही आरती की तैयारी का समय है — पहले जलाधारी से रातभर चढ़ा जल हटाया जाता है, फिर पंचामृत अभिषेक, फिर भस्म अर्पण। पहले चिता-भस्म की परंपरा की कथाएँ प्रचलित हैं; वर्तमान में कपिला गाय के गोबर के कंडों से बनी पवित्र भस्म प्रयोग होती है। यह क्रम वर्ष के 365 दिन बिना नागा चलता है — यही इस आरती को विश्व में अद्वितीय बनाता है।

पर्व और विशेष दिनों में समय कैसे बदलता है?

सामान्य दिनों का 4 बजे वाला नियम पर्वों पर बदल जाता है — यही सबसे ज्यादा भ्रम की जगह है:

दिनभस्म आरती समय (लगभग)टिप्पणी
सामान्य दिन4:00-6:00 AMप्रवेश 2:30-3:00 AM से
सोमवार4:00-6:00 AMसमय वही, भीड़ और सीट की माँग कई गुना
सावन मासप्रायः और जल्दी (लगभग 3:00 AM से क्रम)सवारी वाले सोमवारों पर व्यवस्था विशेष रहती है
महाशिवरात्रिअगले दिन दोपहर तक खिसकती हैनिरंतर पूजन के बाद सेहरा दर्शन, फिर भस्म आरती — दिन में होने वाली दुर्लभ स्थिति
ग्रहण के दिनसूतक अनुसार परिवर्तितमंदिर की घोषणा ही अंतिम

पर्व के दिन यात्रा हो तो उस दिन का घोषित समय आधिकारिक पोर्टल shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जरूर देखें — सोशल मीडिया पर चल रहे पुराने स्क्रीनशॉट से समय का अंदाजा न लगाएँ।

आरती में बैठना है तो प्रवेश की शर्तें

भस्म आरती में प्रवेश का समय जितना जरूरी है, उतनी ही ये तीन शर्तें: पहली — कन्फर्म बुकिंग: ऑनलाइन स्लॉट (लगभग ₹200 प्रति व्यक्ति) आरती से लगभग 60 दिन पहले खुलता है, और सीमित ऑफलाइन काउंटर टिकट (लगभग ₹100) पहले-आओ-पहले-पाओ मिलते हैं; बुकिंग के हर स्टेप के लिए हिंदी बुकिंग गाइड देखें। दूसरी — पहचान: अनुमति पत्र पर दर्ज नाम/ID से मूल दस्तावेज़ का मिलान होता है। तीसरी — वस्त्र: पुरुषों के लिए सोला/धोती, महिलाओं के लिए साड़ी; विवरण ड्रेस कोड गाइड में है। मोबाइल-कैमरा भीतर वर्जित हैं, इसलिए लॉकर के 15-20 मिनट भी समय में जोड़ लें। ध्यान रहे — बुकिंग में सहायता संभव है, पर सीट का अंतिम आवंटन केवल मंदिर समिति करती है; कोई भी सेवा गारंटी नहीं दे सकती।

आरती के बाद का समय कैसे उपयोग करें?

आरती के बाद दर्शन का क्रम समझदारी से बनाएँ तो एक ही सुबह में बहुत कुछ हो जाता है। 6 बजे बाहर निकलकर अधिकांश यात्री महाकाल लोक कॉरिडोर घूमते हैं, जो सुबह की रोशनी में सबसे सुंदर और खाली रहता है। जिन्हें ज्योतिर्लिंग के और समीप पूजन करना हो, वे उसी सुबह रुद्राभिषेक बुकिंग के साथ अभिषेक-पूजन करा सकते हैं। दिन में समय बचे तो शीघ्र दर्शन टिकट से दोबारा दर्शन का विकल्प भी रहता है — दरें VIP दर्शन टिकट प्राइस पेज पर हैं। रात 1:30 बजे जागने वाले दिन की योजना हल्की रखें — आरती के बाद 2-3 घंटे का विश्राम लेकर ही अगला कार्यक्रम बनाना अनुभव को सुखद रखता है।

पहली बार जाने वालों के लिए रात की योजना

समय की जानकारी तभी काम आती है जब रात की व्यवस्था सही हो। सबसे पहला निर्णय — ठहरने की जगह: रात 1:30 बजे निकलना है, इसलिए मंदिर से पैदल दूरी (1-2 किमी) के भीतर ठहरना सबसे व्यावहारिक है; दूर ठहरे हों तो ऑटो/टैक्सी रात 1 बजे के लिए पहले से तय कर लें, क्योंकि उस समय सवारी खोजना आसान नहीं होता। दूसरा — नींद का हिसाब: आरती वाली रात नींद 3-4 घंटे ही मिलेगी, इसलिए पिछली दोपहर आराम कर लें और रात 9-10 बजे तक सो जाएँ; खाली पेट न जाएँ, पर भारी भोजन भी न करें — 3 घंटे एक जगह बैठना होता है। तीसरा — सामान न्यूनतम रखें: अनुमति पत्र का प्रिंट, मूल ID, थोड़ी नकदी और (सर्दियों में) शॉल — बस। मोबाइल होटल में ही छोड़ दें तो लॉकर की कतार बच जाती है। चौथा — परिवार के साथ हों तो भूमिका बाँट लें: एक सदस्य लॉकर और चप्पल काउंटर सँभाले, बाकी कतार में जगह लें; बुजुर्गों और बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था नंदी हॉल में फर्श पर ही होती है, इसलिए घुटनों की तकलीफ वाले सदस्यों को पहले से मानसिक रूप से तैयार रखें। पाँचवाँ — वापसी की योजना: 6 बजे बाहर निकलने पर हजारों लोग एक साथ निकलते हैं; मिलने का स्थान (जैसे गेट नंबर या कोई पहचान-चिह्न) पहले से तय कर लें, क्योंकि भीतर फोन नहीं होता। यह छोटी-सी योजना पहली भस्म आरती को अफरा-तफरी की जगह जीवन का सबसे शांत अनुभव बना देती है।

एक अंतिम सुझाव समय को लेकर — अपनी घड़ी मंदिर की घोषणा से मिलाएँ, अफवाहों से नहीं। हर पर्व से पहले सोशल मीडिया पर 'आज आरती 3 बजे होगी' जैसे असत्यापित संदेश घूमते हैं, जिनके भरोसे पहुँचे श्रद्धालु या तो घंटों पहले पहुँचकर परेशान होते हैं या देर से पहुँचकर प्रवेश चूक जाते हैं। आधिकारिक पोर्टल, मंदिर की घोषणा और अनुमति पत्र पर लिखा समय — बस यही तीन स्रोत मानें। सामान्य दिनों के लिए सीधा सूत्र याद रखें: रात 2 बजे गेट पर, 4 बजे आरती, 6 बजे दर्शन पूर्ण।

Frequently asked questions

महाकाल की भस्म आरती कितने बजे शुरू होती है?

प्रतिदिन तड़के लगभग 4:00 बजे शुरू होकर लगभग 6:00 बजे तक चलती है। पट लगभग 3:00 बजे खुलते हैं और पहले अभिषेक-क्रम होता है। पर्वों पर समय बदल सकता है।

भस्म आरती के लिए कितने बजे पहुँचना चाहिए?

रात 2:00 बजे तक गेट पर पहुँचें — प्रवेश लगभग 2:30-3:00 बजे शुरू होता है और उससे पहले वस्त्र बदलने व लॉकर में सामान जमा करने का समय चाहिए।

क्या बिना बुकिंग के सिर्फ समय पर पहुँचकर आरती देख सकते हैं?

नहीं। आरती क्षेत्र में बैठने के लिए कन्फर्म अनुमति पत्र अनिवार्य है — ऑनलाइन (लगभग ₹200) या सीमित ऑफलाइन काउंटर टिकट (लगभग ₹100)। बिना बुकिंग केवल 6 बजे बाद सामान्य दर्शन संभव है।

महाशिवरात्रि पर भस्म आरती कितने बजे होती है?

महाशिवरात्रि की रातभर पूजा के कारण भस्म आरती अगले दिन दोपहर के आसपास होती है — वर्ष का इकलौता अवसर जब यह दिन में होती है। सटीक समय मंदिर उसी दिन घोषित करता है।

क्या भस्म आरती रोज होती है?

हाँ, वर्ष के सभी दिन — यह महाकालेश्वर की अखंड दैनिक परंपरा है। केवल समय पर्व/ग्रहण के अनुसार आगे-पीछे होता है।

Authoritative referenceMahakaleshwar Bhasma Aarti (official)

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Written and reviewed by the Bhasma Aarti Booking editorial team. Facts checked against primary sources; see the reference above.

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